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शैक्षणिक शोधप्रबंधों में साहित्यिक चोरी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सीमा: अकादमिक ईमानदारी की रक्षा के लिए एक स्पष्ट और न्यायसंगत मानक
अकादमिक ईमानदारी उच्च शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण नींवों में से एक है। पिछले कुछ वर्षों में साहित्यिक चोरी का प्रश्न पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गया है। अब यह केवल किसी पाठ को सीधे नकल करने या स्रोत का सही उल्लेख न करने तक सीमित नहीं है। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग ने शोधप्रबंध, थीसिस, शोध-लेखन और अकादमिक मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया को नई दिशा दी है। इसी कारण विश्वविद्यालयों को ऐसे स्पष्ट, समझने योग्य और न्यायपूर्ण मानकों की आवश्यकता है जो छात्रों, पर्यवेक्षकों और
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